बिहार स्तापना दिवस । श्री पटना साहिब । जामा मस्जिद बिहार । प्राचीन शिव मंदिर । बिहार में बोले जाने वाली भाषाएं। ..

बिहार स्तापना दिवस । श्री पटना साहिब । जामा मस्जिद बिहार । प्राचीन शिव मंदिर । बिहार में बोले जाने वाली भाषाएं। ..

  नमश्कार दोस्तों। ... 

आज हम बात करने वाले है एक ऐतिहासिक राज्य " बिहार " और  बिहार की राजधानी " पटना " है। वैसे तो क्षेत्रफल की दृष्टि से बिहार बारवेह स्थान पर आता है लेकिन जन्शंख्या के मामले में बिहार तीसरे स्थान पे आता है। यह राज्य गंगा नदी और कई सहायक  नदियों के उपजाऊ तट के किनारे बसा हुआ है। मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने  बिहार स्तापना दिवस को 22 मार्च को मनाने का ऐलान किया क्योंकि इसी दिन 1912 में बिहार को अंगेजों द्वारा बंगाल से अलग किआ गया था।  इस दिन पूरे बिहार में सार्वजनिक छुट्टी होती है। 


  • बिहार में कितने धर्म हैं  ?
बिहार शुरू से ही सभी धर्मों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है और सभी धर्मों के लोग आपस में मिल - जुलके रहते हैं। यहाँ ईद में सेवइयां बटती  है तो दिवाली में मिठाइयां ,लोहरी में भंगड़े। 
  • पटना जंक्शन में स्तिथ जामा मस्जिद बिहार का सबसे प्रसिद्ध मस्ज़िद है नमाज़ के वक़्त यहाँ नमाज़ियों की आकर्षण भीड़ लगी रहती है , जो देखने में काफी प्यारा लगता है।
  • श्री पटना साहिब को तो आप जानते ही होंगे तख़्त श्री पटना साहिब सिखों के पांच पवित्र स्थानों में से एक है श्रद्धालुओं की भीड़ यहाँ हमेशा लगी ही रहती है। 

  • बौद्ध धर्म के लिए " गया " शहर का अलग ही महत्व है क्योंकि इसी शहर में बुद्ध जी ने असली ज्ञान प्राप्त किया था तथा "बोधगया " में विशाल प्रतीमा आकर्षण का विशेष केंद्र है। 




  • बिहार का मुंडेश्वरी मंदिर भारत का प्राचीन शिव मंदिर है अपनी प्राचीनता और भव्यता के कारन यह मंदिर भारत की प्राचीन मंदिरों की सूची में शामिल है। 




  • बिहार में बोले जाने वाली भाषाएं ?.. 
  1. हिंदी बिहार की राजभाषा और उर्दू द्वितीय राजभाषा है। मैथिली भारतीय संविधान के अष्टम अनुसूची में सम्मिलित एकमात्र बिहारी भाषा है। हिंदी और उर्दू के साथ-साथ यहाँ भोजपुरी,बज्जिका ,अंगिका तथा मगही बिहार में बोली जाने वाली कई  प्रमुख भाषाओं और बोलियों में शामिल हैं। बिहार ने सबसे पहले हिंदी को अपनी आधिकारिक भाषा माना था। 
  • बिहार के खानपान। ... 
  1. वैसे तो बिहार खानपान की  विविधता के लिए प्रसिद्ध है।  बिहार में बहुत ही पहले से लिट्टी-चोखा खाया जाता है और ये यहाँ कहीं भी आसानी से मिल जाता है लेकिन कहा जाता है की लालू प्रसाद के रेल मंत्री बनने के बाद लिट्टी चोखा भारतीय रेल के हर महत्वपूर्ण स्टशनों पर भी मिलने लगा। लिट्टी चोखा के साथ-साथ यहाँ  दरभंगा के आम और मखाना ,गया के तिलकुट ,खाजा , लीची ,सत्तू ,चूरा ,पूरी-जलेबी। 


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             __धन्यवाद __
                                                                                                                       __अमन कुमार__

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