नमस्कार दोस्तों। ...
आज हम बात करेंगे अपने तीसरे गुरु मतलब अपने अध्यापक के बारे में , कहा जाता है की अगर किसी बच्चे को बढ़िया अध्यापक मिल गया तो वो बच्चा सबसे पहले एक अच्छा और सच्चा इंसान बनेगा। एक अध्यापक खुली किताब की तरह होता है जो अपना ज्ञान अपने विद्यार्थियों को देता है। बच्चे की ज़िंदगी में दो ही कुंजी है सफ़लता की पहले माता-पिता और दुसरे अध्यापक। जिसने इन दोनों की बात सुनी वो समाज का एक मुख्य स्तंभ बनेगा और इतिहास बना देगा।
एक विद्यार्थी के जीवन में अध्यापक का स्थान कई ज़्यादा ऊपर होता है। एक अध्यापक के बिना आप सभ्य और संस्कारी समाज की कल्पना नहीं कर सकते। अध्यापक वो होता है जो आपके काटें भरी ज़िंदगी को सरल और सुगम बनाता है बिना अध्यापक की ज़िंदगी पतवार बिन नौका की तरह होती है जो कभी अनुशासन के किनारे तक नहीं जा सकता।
अध्यापक एक तेज प्रकाश की तरह होता है जो अपने विद्यार्थी को रास्ता दिखाता है , और यही रौशनी अध्यापक अपने विद्यार्थीयों के जीवन में डालता है। एक अध्यापक भगवान की तरह होते हैं जैसे भगवन ने दुनियाँ बनाई वैसे ही एक अध्यापक अच्छा समाज बनाते है। एक अध्यापक समाज में बहुत बड़ी भूमिका अदा करते हैं। अध्यापक अपने विद्यार्थी के विचारों की हमेशा सराहना करते हैं और उनकी बुरी आदतों को दूर करते हैं। जीवन में एक माता-पिता के बाद अध्यापक ही है जो बच्चे के भविष्य के बारे में सोचते हैं नहीं तो इन दोनों के अलावा और कोई नहीं आपके बारे में सोचेगा।
डॉ . सर्वपल्ली राधाकृष्णन भारत के एक बहुत बड़े अध्यापक थे जिनके जन्मदिन के दिन 05 सितम्बर 1888 को हम TEACHER'S DAY यानि "शिक्षक दिवस "के रूप में मनाते हैं । उनका कहना था की एक सच्चा अध्यापक वो है जो बच्चों को अपने बारे में सोचना सिखाये। वे भारतीय इतिहास के ना सिर्फ एक महान अध्यापक थे बल्कि भारत के दूसरे राष्ट्रपति भी थे।
पूरे भारत में 9.5 करोड़ अध्यापक हैं जो रात-दिन एक कर विद्यार्थियों के भविष्य को सवारने की दौड़ में भाग रहे हैं तो आप अपने अध्यापकों की इज्ज़त करे और इनके आज्ञा का पालन करें।
___धन्यवाद __
@ ARYAN
@ UDEY BHAN
@ Braham Dutt
@BUNTY SURYARAJ
:- AMAN KUMAR
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Mast ha
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