भारत अपने जनसंख्या के संख्यात्मक अंकों के साथ दुनिया में सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश है। भारत की वर्तमान जनसंख्या 1.4286 अरब है जबकि चीन की जनसंख्या 1.4257 अरब है। यह अंक भारत की जनसंख्या के बढ़ते गति का दर्शन करते हुए और चीन के जनसंख्या नियंत्रण के परिणाम के रूप में भी समझा जा सकता है।
भारत और चीन, दोनों ही देशों में जनसंख्या की विशालता समस्या के रूप में जानी जाती है। इन दोनों देशों के अंतर्गत विभिन्न धर्म, भाषा, संस्कृति और जीवन शैली हैं।
भारत और चीन के बीच जनसंख्या के मामले में अंतर बढ़ता जा रहा है। इस अंतर को देखते हुए भारत को अपने जनसंख्या के प्रबंधन पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
भारत में जनसंख्या के बढ़ते गति के कुछ मुख्य कारण हैं जैसे कि बढ़ती जीवाश्म दर, उच्च मृत्यु दर और निरंतर विकास की आवश्यकता। भारत की जनसंख्या के बढ़ते अंकों के साथ संबंधित कुछ लाभ हैं। नीचे कुछ महत्वपूर्ण लाभों की एक सूची दी गई है।
- बढ़ती अर्थव्यवस्था: बढ़ती जनसंख्या के साथ भारत की अर्थव्यवस्था में भी सुधार होता जा रहा है। बढ़ती जनसंख्या के कारण उत्पादकता में वृद्धि होती है, जो अर्थव्यवस्था के विकास में मदद करती है।
- बढ़ती श्रमशक्ति: बढ़ती जनसंख्या के साथ भारत में श्रमशक्ति भी बढ़ती है। यह उत्पादकता में वृद्धि करता है और विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार की नई संभावनाएं पैदा करता है।
- देश के विकास में मदद: बढ़ती जनसंख्या देश के विकास में मदद करती है। अधिक जनसंख्या वाले देशों में विकास के लिए विभिन्न तरह के योगदान होते हैं।
- बढ़ती क्षमता: जनसंख्या के बढ़ते अंकों के साथ भारत में बढ़ती क्षमता भी होती है। बढ़ती जनसंख्या के कारण देश में नए आवास, शिक्षा,
- बढ़ती वित्तीय संभवनाएं: जनसंख्या के बढ़ते अंकों के साथ भारत में बढ़ती वित्तीय संभवनाएं भी होती हैं। बढ़ती जनसंख्या के कारण बढ़ते वित्तीय बाजार में भारत को नई और बेहतर संभावनाएं मिलती हैं।
- वैश्विक मंच पर भारत की मजबूत पहचान: बढ़ती जनसंख्या के साथ भारत वैश्विक मंच पर अपनी मजबूत पहचान बनाता है। बढ़ती जनसंख्या के कारण भारत के अंतरराष्ट्रीय महत्व और प्रभाव में वृद्धि होती है।
- बढ़ती क्रांतिकारी उत्पादकता: बढ़ती जनसंख्या के साथ भारत में क्रांतिकारी उत्पादकता भी बढ़ती है। बढ़ती जनसंख्या के कारण उत्पादकता में वृद्धि होती है, जो नए उत्पादों और सेवाओं का विकास संभव बनाती है।
- इन लाभों के साथ-साथ, बढ़ती जनसंख्या के साथ भी कुछ चुनौतियां भी होती हैं। भारत सरकार को जनसंख्या विकास और संरक्षण के लिए नीतियों को ध्यान में रखते हुए सक्रिय रहना होगा।
भारत में बढ़ती जनसंख्या का कुछ नुकसान निम्नलिखित हैं:
- भारत में जनसंख्या के बढ़ते गति के कारण आवास की मांग बढ़ गई है जो आवास की कीमतों को बढ़ाता है। इससे अधिकांश लोगों के लिए उच्च किराये वाले घरों में रहना मुश्किल हो जाता है।
- बढ़ती जनसंख्या के कारण लोगों के बीच संघर्ष बढ़ता है और सामाजिक सुरक्षा पर असर पड़ता है। जिससे जातिवाद, धर्मवाद और अन्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
- बढ़ती जनसंख्या वातावरण और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। विनाशकारी प्रदूषण, दलितों और अल्पसंख्यकों के स्वास्थ्य सुधार की जरूरत, जीवन स्तर की कमी और बढ़ती खाद्य मांग आदि कुछ मुख्य समस्याएं हैं।
- बढ़ती जनसंख्या से शिक्षा और भूमिका के समान वितरण पर भी असर पड़ता है। विविधता के साथ जनसंख्या वृद्धि नियंत्रण के लिए उपयुक्त नहीं होती है
- बढ़ती जनसंख्या के कारण भारत में रोजगार की कमी होती है। जिससे बेरोजगारी और गरीबी बढ़ती है।
- बढ़ती जनसंख्या व्यवस्था की कमजोरी और दुर्बलता को उत्पन्न करती है। जिससे देश की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- बढ़ती जनसंख्या के कारण लोगों के बीच वस्तुओं और सुविधाओं की मांग बढ़ जाती है। जो कई बार वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि का कारण बनती है।
- बढ़ती जनसंख्या के कारण वनों और वन्यजीवों की संख्या में घटाव होता है। जो वातावरण के लिए नकारात्मक प्रभाव डालता है।
- बढ़ती जनसंख्या के कारण सामाजिक सुरक्षा की स्थिति पर असर पड़ता है। बढ़ती जनसंख्या के साथ सामाजिक सुरक्षा की समस्याएं भी बढ़ती हैं।
- बढ़ती जनसंख्या से भारत की संसाधनों का अत्यधिक उपयोग होता है जो सामान्य जनता को प्रभावित करता है।

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